उज्जैन में समर्थन मुल्य पर खरीदी का 1.39 करोड का गेहुं गायब सोसायटी एवं परिवहनकर्ता की मिलीभगत के हालात -800 से 1500 रूपए अधिक कीमत में बेचकर अवैध लाभ अर्जित करने की आशंका

 

उज्जैन। जिले में समर्थन मुल्य पर खरीदी के 396 टन गेहुं गायब होने के मामले में संबंधित सोसायटी और परिवहनकर्ता की मिलीभगत के हालात उभरने की स्थिति बन रही है। 1.39 करोड का यह गेंहु खरीदी के बाद से अपने मूल गोदामों तक नहीं पहुंचा है। इसकी खरीदी करने वाली संस्थाओं के पास भी यह गेंहु नहीं है और न ही परिवहनकर्ता के पास ही है। इस बात की आशंका जताई जा रही है कि गेंहुं 800 से 1500 रूपए अधिक कीमत में बाजार में खपा कर अवैध लाभ अर्जित किया गया है।दो माह पूर्व सरकार ने किसानों से समर्थन मुल्य पर गेहुं खरीदी की थी। प्रदेश में सर्वाधिक खरीदी उज्जैन जिले भर में रेकार्ड स्तर पर की गई थी। इसी गेहुं में से 1.39 करोड से अधिक की राशि का 396 टन गेहुं गायब हो गया है। गेहुं गायब होने का यह मामला खरीदी करने वाली सोसायटी और गोदाम तक पहुंचाने वाले परिवहनकर्ता के बीच ही होना सामने आया है। इस मामले में मिलीभगत उभरने की स्थिति बन रही है।मिलीभगत के पूर्ण आसार-\खाद्य विभाग एवं आपूर्ति निगम से सूत्रों के अनुसार खरीदी करने वाली संस्था एवं परिवहनकर्ता दोनों के पास अगर गेहुं नहीं है और संबंधित गोदामों तक भी नहीं पहुंचा है तो ऐसे में दोनों ही जिम्मेदार हैं। खरीदी संस्था ने अगर परिवहनकर्ता को भंडारण के लिए दिया है तो ऐसे में उसके पास दस्तावेज की पूर्ति होगी और अगर परिवहनकर्ता को नहीं मिला है तो ऐसे में दस्तावेज मिलना मुश्किल है।हर साल का लोचा-ऐसा नहीं है कि समर्थन मुल्य में खरीदी का गेहुं पहली बार गायब हुआ है। प्रति वर्ष ही ऐसा होता आ रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार पिछले लंबे समय से ऐसा है। इसमें शासन को वैसे सीधे तौर पर तो कोई नुकसान नहीं होता है। शासन खरीदी करने वाली संस्था के कमीशन एवं परिवहनकर्ता के बिल से इसकी वसूली कर लेता है,लेकिन गेहुं के विक्रय से अवैध लाभ को नहीं रोक पाता है।इसलिए गायब –विभाग से जुडे सूत्रों ने दावे के साथ कहा कि गायब गेंहु समर्थन मुल्य पर बेचे गए गेहुं की खेप से अच्छी गुणवत्ता का रहा है। ऐसे में खरीदी संस्था से जुडे एवं परिवहनकर्ता ऐसे माल के सौदागरों से सीधे संपर्क में रहते हैं। अच्छी गुणवत्ता के गेहुं को सीधे बीज उत्पादक संस्थाओं को उपलब्ध करवाकर उनसे सीधे तौर पर प्रति क्विंटल रूपए 800 से 1500 का लाभ अर्जित किया जाता है। यह वैसा ही मामला है कि हींग लगे न फिटकरी और रंग भी चौखा। इसमें सीधे तौर पर लाभांवित तो व्यक्तिगत स्तर पर हुआ जाता है और कमीशन संस्था का कट जाता है।172 केंद्रों थे,गायब 396 टन गेहुं-इस वर्ष उज्जैन जिले में 172 केंद्रों के माध्यम से सरकार ने समर्थन मुल्य पर गेहुं की खरीदी की थी। उज्जैन में पिछले वर्ष 95 हजार मेट्रिक टन की अपेक्षा इस बार 1.24 लाख मेट्रिक टन की खरीदी की थी। इसी में से 396 टन गेहुं का हिसाब किताब मिलान में नहीं आ रहा है। प्रारंभिक स्थिति में दस्तावेजों से आंकडों को देखा गया है। सोसायटियों की खरीद एवं वहां से तौलकर परिवहनकर्ता के दस्तावेजों में दर्ज आंकडों को जांचा गया है।मात्र 13 जिलों में गायब-समर्थन मुल्य पर गेहुं की खरीदी पूरे प्रदेश में की गई थी। इसके विपरित प्रदेश के मात्र 13 जिलों में ही यह गडबड हुई है। इसमें जबलपुर – 1433 टन,सागर – 1166 टन,नरसिंहपुर – 804 टन,विदिशा – 694 टन,सतना – 551 टन,आगर मालवा – 518 टन,उज्जैन – 396 टन,राजगढ़ – 330 टन,शाजापुर – 330 टन,रीवा – 308 टन,रायसेन – 253 टन,सिवनी – 220 टन,अशोकनगर – 165 टन शामिल हैं।

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